Friday, 14 July 2017

ख़्वाबों में महफ़िल है...

यकीं है मिलेंगे, ख़्वाबों में हम तुम,
मग़र बेकरारी में, नीदें कहाँ हैं..?

तुम्हीं से रौशन है, मेरी ये दुनिया,
तुम्हीं से खुशियों का कारवां है...

भले दूर हो तुम, जेहन में हो मेरे,
मोहब्बत दिलों में, अब भी जवां है...

फूलों में, खुशबू में, हो तुम हवा में,
तुम्हीं से यारा, ये दिलकश समां है...

चलो मूंद लेते हैं, आँखे हम अपनी,
ख़्वाबों में महफ़िल है, कहकशां है...

....©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐
*9424142450#

Monday, 10 July 2017

सफ़र है ये ज़िन्दगी...

ढूंढने निकला हूँ फिर मैं, ज़िन्दगी के मायने,
शाम तक शायद मिले वो, या अंधेरी रात हो...

सफ़र है ये ज़िन्दगी तो, चलते रहना लाज़मी,
है कभी तनहाईयाँ, कभी हमसफ़र का साथ हो...

एक आहट से किसी की, जोर से धड़का है दिल,
मुमकिन है ये भी दिल के, महज ख़यालात  हो...

शबनमी सुबह कभी तो, दोपहर सी हो तपिश,
अकेले हों हम कभी, और तारों की बारात हो...

चार कदमों का सफ़र, इम्तेहां है हर कदम,
मुस्कुराता चल 'रवीन्द्र', चाहे कोई हालात हो...

...©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐

Sunday, 9 July 2017

उम्मीदों का सूरज... तू आ निकल...

कल तक तेरी तपिश से, हैरान रहा मैं...
आज ढूँढती है नजरें, बन बावरा तुझे...

एक झलक दे भी दे, अब और न तड़पा...
मिल जायेगा सुकून, और आसरा मुझे...

एक साथ तेरा रहते, आबाद थी दुनिया...
नजरें क्या तूने फेरी, भूला जहां मुझे...

सियासत के बादल, कहीं और जा बरस...
रिश्तों की फिसलनों से, अब ले बचा मुझे...

अब के सजन सावन, दीवाना सा लगे...
तेरी याद दिलाकर ये, तड़पायेगा मुझे...

ओ मेरी उम्मीदों का, सूरज तू आ निकल...
खोई हुई मेरी परछाई, वापस दिला मुझे...

...©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐
*9424142450#

Wednesday, 5 July 2017

मुस्कुरा के तो देख...

मिसालें मिलेंगी तेरे नाम की,
तू खुद को ज़रा आमा के तो देख...

चली आयेगी वो हवा की तरह,
तू मौसम की तरह बुला के तो देख...

भले दूर है खुशियों का नगर,
दो कदम ज़रा तू बढ़ा के तो देख...

सिफर है अगर हासिल-ए-ज़िन्दगी,
तू आईना ज़रा मुस्कुरा के तो देख...

रख उम्मीद में तू सुबह शबनमी,
स्याह रातों में ख़्वाब सजा के तो देख...

मिलेगा सुकूं भी दिल को 'रवीन्द्र',
हँस के रिश्ता कोई निभा के तो देख...

....©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐
*9424142450#

Sunday, 2 July 2017

मैं आम आदमी...

लिखी थी ईबारत, फ़लक पे कहीं...
पढ़ ना पाया, रही आँखों में कुछ नमी...

मैं तो बढ़ता रहा, मंजिलों की तरफ...
लोग लिखते रहे, बस एक मेरी कमी...

नहीं अफ़सोस, हासिल भले कुछ नहीं...
उस फ़लक से है बेहतर, मेरी ये जमीं...

सुन ओ तकदीर, ग़र कहीं रहता है तू...
उस फरिश्ते से बेहतर, मैं आम आदमी...

चाँद तारे भी देंगे, गवाही  'रवीन्द्र',
याद आना मेरा, होगा तब लाज़मी...

...©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐
*9424142450#

Friday, 30 June 2017

धूप मुलाकातों की...

उम्मीद-ए-रौशनी में, शब गुजार लेता हूँ...
धड़कनों की सरगम से, सुर उधार लेता हूँ...

काफ़िले वो खुशियों के, मेरी गली आएँगे...
देख के आईना, खुद को संवार लेता हूँ...

छोड़िये वो बातें, जो दिल को दुखा देती हैं...
एक मुस्कुराहट पे, सब कुछ निसार देता हूँ...

धूप मुलाकातों की, इसलिये भी जरूरी है......
एक झलक पा के, दुआएँ हजार लेता हूँ...

दिल में बसाया है ग़र, दुनिया को बताना क्या?...
शबनमी सी यादों को, दिल के तार देता हूँ...

बंद मुठ्ठियों में है, नेमत खुदा की 'रवीन्द्र',
आलम-ए-तन्हाई में, खुद को पुकार लेता हूँ...

...©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐
*9424142450#

Monday, 26 June 2017

उम्मीदों का मौसम जवां हो गया...

बूंदे बारिश की टिप-टिप टपकने लगी,
फिर उम्मीदों का मौसम जवां हो गया...

हुस्न की क्या अज़ब है ये जादूगरी?

आ के गालों पे मोती फ़ना हो गया...

ये सुबह शबनमी गुनगुनाने लगी,

ख़ौफ रातों का जाने कहाँ खो गया..?

तपिश धूप की लो कहीं खो गयी,

खिजां का वो मौसम धुआँ हो गया...

देखो तनहाई बैरन सिमटने लगी,

तेरे आने से दिलकश समां हो गया...

दिल मचलने लगा है यही सोच कर,

फिर से ख़्वाबों का अब कारवां हो गया...

...©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐💐

*9424142450#

पल दो पल के साथ का.....

पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी रहा... ------------------------***-------------------- पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी...