Showing posts with label हसरत. Show all posts
Showing posts with label हसरत. Show all posts

Monday, 21 August 2017

हसरत धुआँ-धुआँ हैं...

हसरत धुआँ-धुआँ हैं,
कैसा तेरा शहर...
मिलते हसीं हजारों,
लेकिन हिज़ाब में...

संगीनों के साये,
पसरे हैं हर तरफ़...
सब कुछ झुलस गया है,
मज़हब के तेज़ाब में...

कोई मसीहा बन के,
आयेगा फिर यहाँ...
मशगूल रहनुमा हैं,
इसी लब्बोलुआब में...

खिड़की भी कैसे खोलें,
बारूद की है बू...
अब तो अमन भी जैसे,
हासिल है ख़्वाब में...

खोलो गिरह ये सारे,
बढ़कर मिलो गले...
ढूंढो न कोई धब्बा,
तुम माहताब में...

कुछ इंतज़ाम ऐसा,
फिर अब न खूं बहे...
न कुरबां हों फौज़ी,
मतलब के जेहाद में...

...©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐

Friday, 31 March 2017

उनकी गलियों से मैं...


उनकी गलियों से मैं...
--------------*****------------

उनकी गलियों से मैं, जब भी गुज़र जाता हूँ...
महकते ग़ुल की तरह, और निखर जाता हूँ...

फ़ासले और बढ़ा दें, ये चलन मुमकिन है...
तेरी आबो इतर है संग, जिधर जाता हूँ...

रात-ओ-दिन होते हैं, मुझे भला क्या लेना है...
बिन तेरे जानशीं, मैं गोया सिफ़र जाता हूँ...

रुख-ए-ताबीर की, हसरत में कट रही है उमर...
बंद आँखों से तुझे, क्या मैं नज़र आता हूँ..?

अब न देखेंगे बहार, बिन उसके हम भी 'रवीन्द्र'...
फ़क़त इसी ख़याल से, जाने क्यूँ सिहर जाता हूँ..?

...©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐💐

पल दो पल के साथ का.....

पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी रहा... ------------------------***-------------------- पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी...