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Sunday, 19 November 2017

मन मोहन हो जाए...


कान्हा की बंशी सबको बुलाए,
राग-प्रेम का गीत सुनाए...
आँख खुले तो, जग वृन्दावन,
स्वप्न में मोहन भाए...

प्रीत की डोर बंधी है ऐसी,
भोर सुहानी, पुरवा जैसी,
तन-मन है इठलाए...
फिर कान्हा क्यों सताए...

आस मेरी है ब्रज बालाएं,
जीवन के नित आस जगाएं,
अंग अंग है मुस्काए...
मन मोहन हो जाए...

आस भरे नैनों को मूंदें,
खो कर मन, मोहन को ढूंढें,
इत उत नित सब पाए...
मन ही मन मुस्काए....

राधा रखे है, मान हिना की,
भेद न जाने, हम यमुना की,
गहरे गोते वो लगाए...
जीवन राह दिखाए...

मन मोहन हो जाए...
मन मोहन हो जाए...


...©रवीन्द्र पाण्डेय 💐💐

जय श्री कृष्णा....

Saturday, 1 April 2017

किसी रोज खुला हो आसमां...



किसी रोज खुला हो आसमां...
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किसी रोज खुला हो आसमां, बाहें फैलाये सारा जहां...
मुमकिन है उस दिन सूरज की, बादल से यारी हो जाए...

धरती पर हरियाली चादर, हर डाल लदी हो जामुन से...
अमन की खुश्बू हवा में हो, हर दिशाएँ न्यारी हो जाए...

महकेगी जब सौंधी मिट्टी, हर बूँद पसीना हो मोती...
राखी बाँधे जब हर बहना, ये जग फुलवारी हो जाए...

हर गाँव बने जब वृन्दावन, चोरी भी हो तो बस माखन...
बन जाऊँ 'रवीन्द्र' सुदामा मैं, हर मित्र मुरारी हो जाए...

...©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐

Tuesday, 23 August 2016

किसी रोज खुला हो आसमां...



किसी रोज खुला हो आसमां...
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किसी रोज खुला हो आसमां, बाहें फैलाये सारा जहां...
मुमकिन है उस दिन सूरज की, बादल से यारी हो जाए...

धरती पर हरियाली चादर, हर डाल लदी हो जामुन से...
अमन की खुश्बू हवा में हो, हर दिशाएँ न्यारी हो जाए...

महकेगी जब सौंधी मिट्टी, हर बूँद पसीना हो मोती...
राखी बाँधे जब हर बहना, ये जग फुलवारी हो जाए...

हर गाँव बने जब वृन्दावन, चोरी हो तो बस माखन की...
बन जाऊँ 'रवीन्द्र' सुदामा मैं, हर मित्र मुरारी हो जाए...

...©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐

पल दो पल के साथ का.....

पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी रहा... ------------------------***-------------------- पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी...