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Monday, 29 March 2021

एक सुंदर उपहार है जीवन...


आओ हिल मिल रंग लगाएँ,
अपनेपन के फूल खिलाएँ।

मगन रहें जीवन धुन में हम,
प्रेम रतन धन गीत सुनाएँ।

भूलें अनचाहे जख़्मों को,
नेह भरे मरहम भी लगाएँ।

मंज़िल कितनी दूर हो चाहे,
बिना रुके हम बढ़ते जाएँ।

दिन हो उनींदे रात हो काली,
चमकीले से ख़्वाब सजाएँ।

ओस की बूंदें आ पत्तों पर,
नित इंद्रधनुषी रंग बनाएँ।

एक सुंदर उपहार है जीवन,
हर दिन हम त्यौहार मनाएँ।

Ravindra Pandey

प्यारी बिटिया आद्या को जन्मदिन के सुअवसर पर कोटिशः बधाई एवं शुभकामनाएं...


 

Tuesday, 28 August 2018

पतझड़ का मौसम है...




जो भी हो जाए कम है,
क्यों तेरी आँखें नम हैं?
देते हैं  ज़ख्म  अपनें,
मिले गैरां से मरहम है।

तू अपनी राह चला चल,
पीकर अपमान हलाहल।
या मोड़ दिशा हवाओं के,
गर तुझमें भी कुछ दम है।

न्याय सिसक कर रोए,
अन्याय की करनी धोए.
यहाँ झूठ, फ़रेब के क़िस्से,
नित लहराते परचम हैं।

नैतिकता हुई है घायल,
संस्कार ने बाँध ली पायल।
किस सत्य की खोज में है?
यहाँ सत्य तो एक वहम है।

सोने की चिड़िया खो गई,
करुणा और ममता सो गई.
मतलब और स्वार्थ के युग में,
विपदा है, दुःख है, गम है।

सुखदेव और बिस्मिल भूले,
अब कौन भगतसिंह झूले?
आज़ाद है; बस किस्सों में,
मेरे देश का ये आलम है।

अफ़सोस करें भी कैसे,
हम जीने लगे हैं ऐसे।
अब कौन सँवारे गुलशन,
यहाँ पतझड़ का मौसम है।

यहाँ पतझड़ का मौसम है।
यहाँ पतझड़ का मौसम है।

...©रवीन्द्र पाण्डेय 💐💐

Saturday, 2 September 2017

महबूब सा मरहम नहीं...



रूठ जाये ये जहां, मुझको कोई गम नहीं...
एक तेरा साथ यारा, महफ़िलों से कम नहीं...

क़ातिलाना हर अदा, गुस्ताख़ हैं तेरी नज़र,
सब उलझने बेमायने, जो तेरे पेंचोखम नहीं...

आशिक़ी या दिल्लगी, सोचेंगे हमने क्या किया,
है मगर मालूम, कोई महबूब सा मरहम नहीं...

कीजिएगा इक इशारा, मिलने आएँगे वहाँ,
जिस जगह सैलाब ही सैलाब हो शबनम नहीं...

कोई कहता है दीवाना, कोई आवारा मुझे,
एक तेरा साथ, और चाहत कोई हमदम नहीं...

...©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐

पल दो पल के साथ का.....

पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी रहा... ------------------------***-------------------- पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी...