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Tuesday, 5 December 2017

खुशनुमा सुबह के ओ सौदागर...


खुशनुमा सुबह के ओ सौदागर, 

बड़ा खूब ढाया है तूने कहर,
लेकर उनींदे हमारी सभी,
देते हो क्यों अलसाया सहर...

कैसी है ख्वाबों की ये अनकही,
बातें दिलों की दिल मे रही,
सुहाना लगे है ख्वाबों का सफर,
बड़ा खूब ढाया है तूने कहर...

धड़कन क्यों बेताब हैं आजकल,
सदियों सा लागे हमें एक पल,
मंज़िल से है खूबसूरत डगर,
बड़ा खूब ढाया है तूने कहर...

ख्वाहिश जवां कैसे होने लगी,
तनहाई सिसक के है रोने लगी,
आंसू हैं या कोई मीठा जहर,
बड़ा खूब ढाया है तूने कहर...

खुशनुमा सुबह के ओ सौदागर,
बड़ा खूब ढाया है तूने कहर...


...©रवीन्द्र पाण्डेय 💐💐

Monday, 25 September 2017

शब्द ही बीज हैं, शब्द ही हैं शज़र...



शब्द की बानगी, शब्द के हैं हुनर,
शब्द से हैं घिरे, ज़िन्दगी के डगर...

शब्द उम्मीद हैं, शब्द दीवानगी,
शब्द से कई रिश्ते, हैं जाते संवर...

शब्द आवाज है, शब्द अंदाज़ है,
शब्द से है घडी, शब्द से है पहर...

शब्द अभिमान हैं, शब्द ही शान हैं,
शब्द से है गली, शब्द से है शहर...

शब्द खेलेंगे जब, कभी जज्बात से,
शब्द घुल जाएंगे, बन के मीठा जहर...

शब्द को फिर संभालें आओ सभी,
शब्द ही बीज हैं, शब्द ही हैं शज़र...

शब्द तुमने कहे, वो मुझे मिल गये,
शब्द ने गुदगुदाया, मुझे रात भर...

शब्द की बातें अब, क्या कहूँगा 'रवींद्र',
शब्द से मेरी दुनियां, शब्द से मेरा घर...


...©रवीन्द्र पाण्डेय 💐💐

पल दो पल के साथ का.....

पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी रहा... ------------------------***-------------------- पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी...