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Wednesday, 5 July 2017

मुस्कुरा के तो देख...

मिसालें मिलेंगी तेरे नाम की,
तू खुद को ज़रा आमा के तो देख...

चली आयेगी वो हवा की तरह,
तू मौसम की तरह बुला के तो देख...

भले दूर है खुशियों का नगर,
दो कदम ज़रा तू बढ़ा के तो देख...

सिफर है अगर हासिल-ए-ज़िन्दगी,
तू आईना ज़रा मुस्कुरा के तो देख...

रख उम्मीद में तू सुबह शबनमी,
स्याह रातों में ख़्वाब सजा के तो देख...

मिलेगा सुकूं भी दिल को 'रवीन्द्र',
हँस के रिश्ता कोई निभा के तो देख...

....©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐
*9424142450#

Friday, 30 June 2017

धूप मुलाकातों की...

उम्मीद-ए-रौशनी में, शब गुजार लेता हूँ...
धड़कनों की सरगम से, सुर उधार लेता हूँ...

काफ़िले वो खुशियों के, मेरी गली आएँगे...
देख के आईना, खुद को संवार लेता हूँ...

छोड़िये वो बातें, जो दिल को दुखा देती हैं...
एक मुस्कुराहट पे, सब कुछ निसार देता हूँ...

धूप मुलाकातों की, इसलिये भी जरूरी है......
एक झलक पा के, दुआएँ हजार लेता हूँ...

दिल में बसाया है ग़र, दुनिया को बताना क्या?...
शबनमी सी यादों को, दिल के तार देता हूँ...

बंद मुठ्ठियों में है, नेमत खुदा की 'रवीन्द्र',
आलम-ए-तन्हाई में, खुद को पुकार लेता हूँ...

...©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐
*9424142450#

Monday, 26 June 2017

उम्मीदों का मौसम जवां हो गया...

बूंदे बारिश की टिप-टिप टपकने लगी,
फिर उम्मीदों का मौसम जवां हो गया...

हुस्न की क्या अज़ब है ये जादूगरी?

आ के गालों पे मोती फ़ना हो गया...

ये सुबह शबनमी गुनगुनाने लगी,

ख़ौफ रातों का जाने कहाँ खो गया..?

तपिश धूप की लो कहीं खो गयी,

खिजां का वो मौसम धुआँ हो गया...

देखो तनहाई बैरन सिमटने लगी,

तेरे आने से दिलकश समां हो गया...

दिल मचलने लगा है यही सोच कर,

फिर से ख़्वाबों का अब कारवां हो गया...

...©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐💐

*9424142450#

Sunday, 2 April 2017

दो घड़ी का साथ माँगा....



दो घड़ी का साथ माँगा, 
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दो घड़ी का साथ माँगा, तो बुरा क्या हो गया..?
हमने उनका हाथ माँगा, तो बुरा क्या हो गया..?

हम न सोचे थे कभी, दिल का लगाना खेल है..?
स्वर्ग से रिश्ते बने है, क्या ग़ज़ब का मेल है..!
महकते जज़्बात माँगा, तो बुरा क्या हो गया..?
दो घड़ी का साथ माँगा....

और क्या कुछ चाहिये, हमसफ़र वो साथ हो...
साँझ-सुबह रात-दिन, हाथों में उनका हाथ हो...
शबनमी बरसात माँगा, तो बुरा क्या हो गया..?
दो घड़ी का साथ माँगा...

रात हो उजली किरण सी, भोर हो सिन्दूर सा...
दूर तक रौशन जहां हो, प्रेम रस में चूर सा...
मरमरी हालात माँगा, तो बुरा क्या हो गया..?
दो घड़ी का साथ माँगा...


...©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐💐

पल दो पल के साथ का.....

पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी रहा... ------------------------***-------------------- पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी...