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Friday, 5 May 2017

आसमान सी आस...



बेतरतीब सी ख्वाहिशें, आसमान सी आस...
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बेतरतीब सी ख्वाहिशें, आसमान सी आस...
दूर क्षितिज सागर फैला, मिटती नहीं है प्यास...

मुठ्ठी भर साँसे महज़, फिर मिट्टी बे मोल...
परछाईं से सब रिश्ते, सतही हो या ख़ास...

पानी सा मन है सरल, रंग लो कोई रंग...
गाँठ है लगना लाज़मी, टूटे जब विश्वास...

धवल हुआ है नील गगन, रैन हुई बेचैन...
धरती अम्बर रच रहे, दूर क्षितिज पर रास...


...©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐
*9424142450#...

Monday, 3 April 2017

सरहदों के पार...


                      फिलिपीन्स में भुखमरी की भयावहता को प्रदर्शित करती छायाचित्र.... 

..........से प्रेरित पंक्तियाँ....






सरहदों के पार भी....
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सरहदों के पार भी, होता है सुन्दर सा जहान...
ख़ुशनुमा बहती हवा, और गीत गाता आसमान...

हाथ छोटे हैं मग़र, हमें चाँद तारों की ललक...
खोल दो ये बंदिशें, फिर देख लो मन की उड़ान...

रंग खूं सब लाल है, इस पार भी उस पार भी...
फिर सबक़ लेते नहीं, क्यों हैं हमारे हुक्मरान..?

बाद इन सांसो के मिट्टी, पाक भी नापाक भी...
फिर ग़ुरूर किस बात पे?,शेख़ सूफ़ी राज़दान...

....©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐💐

Saturday, 1 April 2017

मैं बादल खींच के दिन ढँक दूँ...


मैं बादल खींच के दिन ढँक दूँ,
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मैं बादल खींच के दिन ढँक दूँ,
सहला कर चाँद जवान करूँ...

उनके आँचल की बात लिखूँ,
इस धरती को आसमान करूँ...

जुगनूं संग खेलूँ लुका छिपी,
अंधियारे को रौशनदान करूँ...

मैं सींचू सदा उम्मीद ए दरख़्त,
क्यूँ ख़्वाब कोई सुनसान करूँ...

लो सुबक रही ये स्याह रात,
इसे तारों का गुलदान करूँ...

मैं लिखूँ अमन और खुशहाली,
जग में फिर नया बिहान करूँ...

....©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐💐


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पल दो पल के साथ का.....

पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी रहा... ------------------------***-------------------- पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी...