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Wednesday, 18 July 2018

तुम जो मिले, ये गुल खिले...


तुम जो मिले, ये गुल खिले,
तुम जो मिले, ये गुल खिले,
दूरियां फ़ना हुई, मिटे फासले...
दूरियां फ़ना हुई, मिटे फासले...
तुम जो मिले...

बेचैन था ये दिल,  अरमान धुआँ-धुआँ,
चैन कहीं पायें ना, जाएं भला हम कहाँ,
हरदम सताये हमें, शिकवे गिले...
तुम जो हमें, ये गुल खिले...
तुम जो मिले...

जाने किस मोड़ पे, मिल जाओ तुम,
जाने किस घड़ी,  नज़र  आओ  तुम,
ख़्वाबों में ख़यालों में, यही सिलसिले...
तुम जो मिले, ये गुल खिले...
तुम जो मिले...

रातें गुजरती नहीं, दिन खफ़ा खफ़ा,
भूल  क्या हुई  हम से,  कोई दे बता,
खता गर हुई हम से,  सजा भी मिले...
तुम जो मिले, ये गुल खिले...
तुम जो मिले...

यही सोचता है दिल, देखें बस तुम्हें,
डाले  बाहें बाहों में,  संग-संग  झूमें,
दिल की  बेकरारी को,  करार  मिले...
तुम जो मिले, ये गुल खिले...
तुम जो मिले...

तुम जो मिले, ये गुल खिले...
दूरियां फ़ना हुई, मिटे फासले...

...©रवीन्द्र पाण्डेय 💐💐
*9424142450#

Friday, 13 April 2018

हम से ही नज़रें चुराने लगे....

मौसम ज़रा ज़र्द हो क्या गया,
वो हम से ही नज़रें चुराने लगे।

कल तक रहे धड़कनों की तरह,
साये से भी पीछा छुड़ाने लगे।

काँच से भी नाज़ुक अरमां मेरे,
छुआ तो लहू ये बहाने लगे।

शुक्र है तुम्हें सम्भलना आ गया,
हम आँखों से मोती गिराने लगे।

तनहा कटे क्यों उमर का सफ़र,
यादों की महफ़िल सजाने लगे।

हो सके रौशनी राहों में तेरी,
यही सोच खुद को जलाने लगे।

मिलेंगे कई मोड़ रुसवाईयों के,
डगर प्रेम कोई जो जाने लगे।

जो चाहो तो महसूस करना हमें,
हम भी घटा बन के छाने लगे।

दिल ये मेरा गोया दिल ही तो है,
भला हम इसे क्यों समझाने लगे।

आहट जरा-सी हुई क्या 'रवीन्द्र' ,
सौ अरमान दिल में सजाने लगे।

...©रवीन्द्र पाण्डेय 💐💐
*9424142450#

पल दो पल के साथ का.....

पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी रहा... ------------------------***-------------------- पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी...