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Saturday, 24 April 2021

हुई नए दिन की शुरुआत...

ख़्वाब सजाए गुज़री रात,

सुबह सलोनी, महके पात।

चहकती चिड़िया दे संदेश,

हुई नए दिन की शुरुआत।।


कलियाँ चटक के फूल हुए,

संशय  सब  निर्मूल  हुए।

उपवन की अनुपम सौगात,

हुई नए दिन की शुरुआत।।


भौरें  फिर  मंडरायेंगे,

अनुपम गीत सुनाएंगे।

कह डालेंगे दिल की बात,

हुई नए दिन की शुरुआत।।


बिस्तर छोड़ किसान उठा,

हर मजदूर,  जवान उठा।

सुधरेंगे  फिर  से  हालात,

हुई नए दिन की शुरुआत।।


समय सदा ना एक रहा,

धार भी लें तटबंध बहा।

सर्दी, गर्मी फिर बरसात,

हुई नए दिन की शुरुआत।।


तू भी अपनी ऑंखें खोल,

बोल सहज ही मीठे बोल।

कर हालात से दो दो हाथ,

हुई नए दिन की शुरुआत।।


www.kaviravindra.com

#9424142450









 

Sunday, 28 May 2017

उम्मीद हैं सांसे, ख़्वाब है ज़िन्दगी....


सुनो, आओ ना, आ भी जाओ,
यूँ दूर रहकर, अब ना तड़पाओ...

एक तुम्हारा ही इंतज़ार,
बस एक तुमसे ही प्यार,
यही मेरी जिन्दगी,
ये सांसो का कारोबार,
दूर-दूर रहकर, अब ना सताओ...
सुनो, आओ ना, आ भी जाओ...

महक है जेहन में,
पहली मुलाकात की,
मौसम तो बदले,
आँखों के बरसात की,
कुछ तो करो ऐसा, बस मेरी हो जाओ...
सुनो, आओ ना, आ भी जाओ...

गलियां सूनी, पनघट प्यासा, रस्ते हैं उदास,
अपने यहाँ होने का, दे दो इन्हें अहसास,
मेरे घर आँगन में, प्रेम दीपक जलाओ...
सुनो, आओ ना, आ भी जाओ...

अधूरे हैं सपने, गुमसुम सब अपने,
किसको सताऊँ? और किसको मनाऊँ?
किस से कहूँ बात, और हल्का हो जाऊँ,
हाँ रूठे हो बेशक़, पर अब मान जाओ...
सुनो, आओ ना, आ भी जाओ...

उम्मीद हैं सांसे, ख़्वाब है ज़िन्दगी,
मुक़म्मल हो मोहब्बत, यही ईबादत और बन्दगी,
ओ मौसम ए ग़ुल, मेरी दुनिया महकाओ...
सुनो, आओ ना, आ भी जाओ...
यूँ दूर रहकर, मुझे ना तड़पाओ...

...©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐

छाया चलचित्र... गूगल से साभार...

Saturday, 15 April 2017

सबब हम ने जाना इस बात का...


सबब हम ने जाना इस बात का...
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सबब हम ने जाना इस बात का,

बे ताअल्लुक़ सी मुलाक़ात का...

दबाया हथेली तो शरमा गये,

हसीं वाकया ये जुमेरात का...

गली का किनारा ना भूला गया,

कभी था गवाही मेरी बात का...

हिना रँग लाती कहाँ आज़कल,

आँखों मे मौसम है बरसात का...

ख़्वाबों में ही, पर मिलो तो सही,

क़दर लाज़मी है जज़्बात का...

...©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐



खुशियों की फ़ितरत परछाईयाँ सी,
नज़र में है लेकिन, हासिल नहीं...
ख़्वाबों की भीड़ में, घुटन ये कैसी,
क्या नींद मेरी इस क़ाबिल नहीं..?



....©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐

Wednesday, 5 April 2017

कभी ऐसा भी हो मंज़र...



कभी ऐसा भी हो मंज़र,
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कभी ऐसा भी हो मंज़र,

हँसी चेहरा तेरा देखूँ...
बड़े तनहा से लगते है,
नज़ारे बिन तेरे हमदम...

कभी ख़्वाबों में तुम आओ,

ये आँखें हों उनींदी सी...
मेरी हर सांस हो महकी,
तुम्हारे प्यार का मौसम...

गली वो याद करती है,

जहाँ पायल की छनछन थी...
तरसते हैं नज़ारे भी,
हुआ बरसात का मौसम...

हवा ख़ामोश हो जाये,

कोयल गीत क्यूँ गाये?
जब तुम गुनगुनाती हो,
आये प्यार का मौसम...

....©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐💐

पल दो पल के साथ का.....

पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी रहा... ------------------------***-------------------- पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी...