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Wednesday, 12 January 2022

गुनगुनाती हो जिसे, वो सुरीला राग हूँ...


ओस बन छू लूँ तुझे मैं,

धुन्ध बन कर साथ हूँ।

तन-बदन को ताज़गी दे,

वो हसीन ख़यालात हूँ।।


मैं तेरी राहों का रहबर,

धूप में साया सघन।

जो खुशी दे उम्र भर,

अलमस्त वो लमहात हूँ।।


मैं तेरे ख़्वाबों की रंगत,

और ख़यालों का हुदूद।

जुस्तज़ु की लगन हूँ मैं,

गुफ़्तगू की बिसात हूँ।।


गुनगुनाती हो जिसे तुम,

वो सुरीला राग हूँ।

सिर्फ आँखों से बयां हो,

दिल की गहरी बात हूँ।।


नित प्रेम के संदेश दे,

वो मुस्कुराता मेघ हूँ।

प्यास वसुधा की बुझा दे,

मैं वही बरसात हूँ।।

#हुदूद=सीमाएँ,हद 

www.kaviravindra.com

छायाचित्र google से साभार...

Thursday, 7 September 2017

यूँ ही दिल जलानेे से...

छुप गया  है चाँद क्यों, सूरज के आ जाने से,
वो भी तनहा है, सितारों के बिन ज़माने से...

मैं ही खामोश हूँ, या दौर है तनहाई का,
कोई तो मिलने हमें, आये किसी बहाने से...

ये भीड़  यूँ हर रोज, जाने कहाँ  जाती है,
इसे परहेज क्यों, कहीं भी ठहर जाने से...

चलो रूठे हुए, किस्मत को  मना लाते है,
वो  तो मान जाएगा, ज़रा सा मुस्कुराने से...

लिखा है गर साथ तो,आयेगा वो कहीं भी रहे,
मिलता नहीं सुकूं भी, यूँ ही दिल जलानेे से...

उम्र भर का साथ, देता है भला कौन यहाँ,
चली भी जाती है, वो परछाई धूप जाने से...

...©रवीन्द्र पाण्डेय 💐💐

पल दो पल के साथ का.....

पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी रहा... ------------------------***-------------------- पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी...