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Sunday, 26 September 2021

माँ-बाप की होती हैं ये, पहचान बेटियाँ...


माँ बाप की होती हैं, ये पहचान बेटियाँ,

बेटे जमीन हैं, तो आसमान बेटियाँ।


बेटों से बढ़ा वंशवृक्ष, सत्य है मगर,

देती हैं सदा उसे, फूल और पान बेटियाँ।


वीरों को जन्म दे, लाती हैं जहां में, 

करती नहीं खुद के कभी, गुणगान बेटियाँ।


बेटे हैं महकते हुए गुल, बात ये सच है,

संवारती गुलों को, ये गुलदान बेटियाँ।


मसला हो कोई, मुश्किलात आन पड़ी हो,

रखती हैं हमेशा ही, समाधान बेटियाँ।


बेटों पे फक्र करने वाले, ये भी याद रख,

दोनों कुलों की बढ़ाती हैं, मान बेटियाँ।।


Happy International Daughters Day...

www.kaviravindra.com

Saturday, 1 April 2017

मैं बादल खींच के दिन ढँक दूँ...


मैं बादल खींच के दिन ढँक दूँ,
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मैं बादल खींच के दिन ढँक दूँ,
सहला कर चाँद जवान करूँ...

उनके आँचल की बात लिखूँ,
इस धरती को आसमान करूँ...

जुगनूं संग खेलूँ लुका छिपी,
अंधियारे को रौशनदान करूँ...

मैं सींचू सदा उम्मीद ए दरख़्त,
क्यूँ ख़्वाब कोई सुनसान करूँ...

लो सुबक रही ये स्याह रात,
इसे तारों का गुलदान करूँ...

मैं लिखूँ अमन और खुशहाली,
जग में फिर नया बिहान करूँ...

....©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐💐


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पल दो पल के साथ का.....

पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी रहा... ------------------------***-------------------- पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी...