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Saturday, 26 June 2021

उम्मीदें रंगोली सजाने लगीं...

सुहानी सुबह मुस्कुराने लगी।

हवाएँ मिलन गीत गाने लगीं।।


बारिश की बूंदों ने छुआ बदन।

उम्मीदें रंगोली सजाने लगीं।।


सूरज मनाने गया छुट्टियाँ।

बदली भी पायल छनकाने लगी।।


नदिया जो गुमसुम, मायूस थी।

फिर हो कर जवां इतराने लगी।।


ज़मीं पर बने कदमों के निशां।

राहें फिर मेंहदी रचाने लगीं।।


किसी बात पर, जैसे रूठे पिया।

धरा सज संवर के रिझाने लगी।।


बदलना ही है, हर एक दौर को,

सबक ज़िन्दगी ये सिखाने लगीं।।


www.kaviravindra.com

Pic. courtesy google...



 

Monday, 25 September 2017

शब्द ही बीज हैं, शब्द ही हैं शज़र...



शब्द की बानगी, शब्द के हैं हुनर,
शब्द से हैं घिरे, ज़िन्दगी के डगर...

शब्द उम्मीद हैं, शब्द दीवानगी,
शब्द से कई रिश्ते, हैं जाते संवर...

शब्द आवाज है, शब्द अंदाज़ है,
शब्द से है घडी, शब्द से है पहर...

शब्द अभिमान हैं, शब्द ही शान हैं,
शब्द से है गली, शब्द से है शहर...

शब्द खेलेंगे जब, कभी जज्बात से,
शब्द घुल जाएंगे, बन के मीठा जहर...

शब्द को फिर संभालें आओ सभी,
शब्द ही बीज हैं, शब्द ही हैं शज़र...

शब्द तुमने कहे, वो मुझे मिल गये,
शब्द ने गुदगुदाया, मुझे रात भर...

शब्द की बातें अब, क्या कहूँगा 'रवींद्र',
शब्द से मेरी दुनियां, शब्द से मेरा घर...


...©रवीन्द्र पाण्डेय 💐💐

Monday, 10 July 2017

सफ़र है ये ज़िन्दगी...

ढूंढने निकला हूँ फिर मैं, ज़िन्दगी के मायने,
शाम तक शायद मिले वो, या अंधेरी रात हो...

सफ़र है ये ज़िन्दगी तो, चलते रहना लाज़मी,
है कभी तनहाईयाँ, कभी हमसफ़र का साथ हो...

एक आहट से किसी की, जोर से धड़का है दिल,
मुमकिन है ये भी दिल के, महज ख़यालात  हो...

शबनमी सुबह कभी तो, दोपहर सी हो तपिश,
अकेले हों हम कभी, और तारों की बारात हो...

चार कदमों का सफ़र, इम्तेहां है हर कदम,
मुस्कुराता चल 'रवीन्द्र', चाहे कोई हालात हो...

...©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐

पल दो पल के साथ का.....

पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी रहा... ------------------------***-------------------- पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी...