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Saturday, 17 April 2021

चाँद अकेला छत पर तनहा...

चाँद अकेला छत पर तनहा,

हरसू एक ख़ामोशी है।

रात उनींदी अलसाई सी,

आँखों में मदहोशी है।


तारे निपट अकेले हैं सब,

धुआँ धुआँ सा ये आलम।

बातें बन्द हुई क्यों इनकी,

हर एक इनमें दोषी है।


राह अकेले चुप सा बैठा,

मंज़िल बेहद तनहा है।

यादों के सौ दस्तक दिल पर,

ख़्वाबों की सरगोशी है।


#हरसू=चारो तरफ़

#सरगोशी=कानाफूसी


www.kaviravindra.com

 

Wednesday, 5 April 2017

कभी ऐसा भी हो मंज़र...



कभी ऐसा भी हो मंज़र,
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कभी ऐसा भी हो मंज़र,

हँसी चेहरा तेरा देखूँ...
बड़े तनहा से लगते है,
नज़ारे बिन तेरे हमदम...

कभी ख़्वाबों में तुम आओ,

ये आँखें हों उनींदी सी...
मेरी हर सांस हो महकी,
तुम्हारे प्यार का मौसम...

गली वो याद करती है,

जहाँ पायल की छनछन थी...
तरसते हैं नज़ारे भी,
हुआ बरसात का मौसम...

हवा ख़ामोश हो जाये,

कोयल गीत क्यूँ गाये?
जब तुम गुनगुनाती हो,
आये प्यार का मौसम...

....©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐💐

पल दो पल के साथ का.....

पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी रहा... ------------------------***-------------------- पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी...