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Friday, 8 June 2018

मैं सोचता हूँ....

मैं सोचता हूँ, एक ख़्वाब बुनूं,
हीरे-मोती, माहताब चुनूं...
दिखला दूं, कौन हूँ! दुनियाँ को,
मन में अक्सर यही बात गुनूं...

क्यों बरखा भाए मधुबन को,
शीतल कर जाए तन-मन को,
भीगेगीं अल्हड़ पंखुड़ियाँ,
उस पल बूंदों का राग सुनूं...
मैं सोचता हूँ...

जब पनिहारिन पनघट जाए,
गागर में सागर भर लाये...
जब बलखाती गुलनार चले,
उस पायल की झनकार सुनूं...
मैं सोचता हूँ...

अंगना बाबुल का बिसराये,
दुल्हन घूंघट में शरमाए...
जब सजे पिया के खातिर वो,
उस पल गजरे का हार चुनूं...
मैं सोचता हूँ...

बचपन जब खेले आंचल में,
जैसे हो चंदा बादल में...
जहाँ बिन बातों के हंसी खिले,
ऐसे ख़्वाबों के तार धुनूं...
मैं सोचता हूँ...

जब बिंदिया गजरा बात करें,
पायल कंगन उत्पात करें...
छुअन से सिमटे तन और मन,
वही प्रेम रचित मनुहार सुनूं...
मैं सोचता हूँ...

हर आंगन में किलकारी हो,
काँधों पर जिम्मेदारी हो...
सिर ढांके बहुएं पैर छुए,
वृन्दावती के वही राग सुनूं...
मैं सोचता हूँ...

मन पुलकित. तन कुसुमित हो,
नहीं प्रेम पिपासा परिमित हो...
उस नटवर नागर मोहन के,
बंशी से धुन मल्हार सुनूं...
मैं सोचता हूँ...

मैं सोचता हूँ, एक ख़्वाब बुनूं
हीरे-मोती, माहताब चुनूं...
दिखला दूं, कौन हूँ! दुनियाँ को.
मन में अक्सर यही बात गुनूं...
मैं सोचता हूँ...
मैं सोचता हूँ...

...©रवीन्द्र पाण्डेय 🌹🌹
*9424142450#

Sunday, 28 May 2017

उम्मीद हैं सांसे, ख़्वाब है ज़िन्दगी....


सुनो, आओ ना, आ भी जाओ,
यूँ दूर रहकर, अब ना तड़पाओ...

एक तुम्हारा ही इंतज़ार,
बस एक तुमसे ही प्यार,
यही मेरी जिन्दगी,
ये सांसो का कारोबार,
दूर-दूर रहकर, अब ना सताओ...
सुनो, आओ ना, आ भी जाओ...

महक है जेहन में,
पहली मुलाकात की,
मौसम तो बदले,
आँखों के बरसात की,
कुछ तो करो ऐसा, बस मेरी हो जाओ...
सुनो, आओ ना, आ भी जाओ...

गलियां सूनी, पनघट प्यासा, रस्ते हैं उदास,
अपने यहाँ होने का, दे दो इन्हें अहसास,
मेरे घर आँगन में, प्रेम दीपक जलाओ...
सुनो, आओ ना, आ भी जाओ...

अधूरे हैं सपने, गुमसुम सब अपने,
किसको सताऊँ? और किसको मनाऊँ?
किस से कहूँ बात, और हल्का हो जाऊँ,
हाँ रूठे हो बेशक़, पर अब मान जाओ...
सुनो, आओ ना, आ भी जाओ...

उम्मीद हैं सांसे, ख़्वाब है ज़िन्दगी,
मुक़म्मल हो मोहब्बत, यही ईबादत और बन्दगी,
ओ मौसम ए ग़ुल, मेरी दुनिया महकाओ...
सुनो, आओ ना, आ भी जाओ...
यूँ दूर रहकर, मुझे ना तड़पाओ...

...©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐

छाया चलचित्र... गूगल से साभार...

पल दो पल के साथ का.....

पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी रहा... ------------------------***-------------------- पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी...