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Saturday, 23 November 2019

सूना है तुम बिन, ये सारा जहां...



किसको सुनाऊँ, अज़ब दास्तां,
सूना है तुम बिन, ये सारा जहां।

रुँधा गला है, और आँखें हैं नम,
मुस्कुराने की मैंने, ली है कसम,
समय चल रहा है, हवा बह रही,
ठहर सा गया हूँ, एक मैं ही माँ।
सूना है तुम बिन...

कसक हैं कई पर सुनाऊँ किसे,
ये पाँवों के छाले दिखाऊँ किसे,
बिखर जो गया, समेटेगा  कौन,
नहीं हाथ तुझसा, कोई और माँ।
सूना है तुम बिन...

हुई गलतियाँ भी, कई बार तब,
पर आज जाना है इनका सबब,
सिखाया है तूने बहुत कुछ मुझे,
नहीं भूला मैं भी सबक कोई माँ।
सूना है तुम बिन...

किसको सुनाऊँ,  अज़ब दास्तां,
सूना है तुम बिन, ये सारा जहां।


...©रवीन्द्र पाण्डेय 💐💐
    #9424142450#

दसवीं पुण्यतिथि पर स्मृतिशेष ममतामयी माँ के श्री चरणों में सादर समर्पित...

Friday, 24 November 2017

सँवारो इन्हें.... मेरी माँ...


बेचैन मन फिर ढूंढे वो आँचल,
बन कर हवा उड़ चली हो कहाँ...

यूँ तो खिले चाँद तारे हैं बेशक,
लगे स्याह फिर क्यों हमें आसमां...

ये धरती, अम्बर, नज़ारे वही हैं,
लगे फिर क्यों सूना ये सारा जहां...

चलना सिखाया हमें थाम उँगली,
कोई देख ले बन गया कारवां...

हासिल है दुनिया सबकी नज़र में,
वक़्त भी जालिम हुआ मेहरबां...

कहने को बहुत कुछ है दिल में,
बातें किसे सब करें हम बयां...

रिश्ते हुए कई बेज़ार तुम बिन,
आ कर सँवारो इन्हें मेरी माँ...

...©रवीन्द्र पाण्डेय 💐💐

24 नवम्बर... नवम पुण्यतिथि पर ममतामयी माँ को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि...

Wednesday, 5 April 2017

मेरा मन बावला सा....



मेरा मन बावला सा, फिरता यहाँ वहाँ...
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मेरा मन बावला सा, फिरता यहाँ वहाँ,
है कौन सी वो महफ़िल, पाऊँ सुकूं जहाँ..?
बहल ही जाता है मन, रिश्तों की ऐसी डोर...
पर नज़रें तलाशती हैं, कहाँ खो गई है माँ..?

सब कुछ हुआ है हासिल, तू भी गगन से देख़...
आबाद तेरा आँगन, बच्चों के काज नेक...
हर ओर प्रेम महके, है खुशियों का कारवां...
पर नज़रें तलाशती हैं, कहाँ खो गयी है माँ..?

तेरे हाथों से सँवर के, बिटिया दुल्हन बनी...
बेटों को ऊँगली देकर, कितना किया धनी...
रिश्ते निभाये कितने, जैसे फैला ये आसमाँ...
ये नज़रें तलाशती हैं, कहाँ खो गयी है माँ..?

मज़बूत बाजुओं से, सींचा है ये गुलशन...
अक्सर मैं देखता हूँ, उनका उदास मन...
मुस्कान ही हैं बाकी, खोया है कहकशाँ...
पर नज़रें तलाशती हैं, कहाँ खो गयी है माँ...

किस्से कहानियाँ से, अब रखता हूँ सरोकार...
हर पल तड़प रहा हूँ, फिर पाने को तेरा प्यार... 
ख़्वाबों में ही यकीं है, हक़ीक़त हुआ धुआँ...
पर नज़रें तलाशती हैं, कहाँ खो गयी है माँ..?

उलझन भरी है दुनिया, और बेरंग सा जहां...
ये नज़रें तलाशती हैं, कहाँ खो गयी है माँ..?
कहाँ खो गयी है माँ, कोई लौटा दे मेरी माँ...
ये बेटा पुकारता है, बस लौटा दे मेरी माँ...

...©रवीन्द्र पाण्डेय💐💐💐

पल दो पल के साथ का.....

पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी रहा... ------------------------***-------------------- पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी...