Saturday, 17 April 2021

चाँद अकेला छत पर तनहा...

चाँद अकेला छत पर तनहा,

हरसू एक ख़ामोशी है।

रात उनींदी अलसाई सी,

आँखों में मदहोशी है।


तारे निपट अकेले हैं सब,

धुआँ धुआँ सा ये आलम।

बातें बन्द हुई क्यों इनकी,

हर एक इनमें दोषी है।


राह अकेले चुप सा बैठा,

मंज़िल बेहद तनहा है।

यादों के सौ दस्तक दिल पर,

ख़्वाबों की सरगोशी है।


#हरसू=चारो तरफ़

#सरगोशी=कानाफूसी


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ये कौन से भँवर में, आ गई है ज़िन्दगी...

ये कौन से भँवर में, आ गई है ज़िन्दगी।

खैरियत के मायने, ज़िंदा बचे हैं हम।।


ख़्वाब उड़ गये सभी, हो कर धुआँ धुआँ।

चैन ओ सुकूं फ़ना, नींद आती है कम।।


सोचा था बसाएँगे, बस्ती भी चाँद पर।

सूनी पड़ी है धरती, रहने को लोग कम।।


किससे हुई ये चूक, गफ़लत ये है कैसी।

थम सी गई है धड़कन, ऑंखें हुई हैं नम।।


कराहते गली, शहर, सिसक रहे श्मशान।

हो गए हैं नाकाफ़ी, रूपये, टका, दिरहम।।


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छायाचित्र गूगल से साभार...



ज़िन्दगी दे रही है, सदा प्यार की...


 भूल शिकवे गिले, हाथ थामों ज़रा।

दौर बिल्कुल नहीं है ये तकरार की।।


रोक लो पाँव को अब दहलीज़ पर।

मान रख लो प्रियतम के मनुहार की।।


वक़्त ये भी, गुज़र जाएगा देखना।

ज्यादा होती नहीं, उम्र है ख़ार की।।


यूँ न मायूस हो, दस्तक ए मौत से।

ज़िन्दगी  दे रही है, सदा प्यार की।।


धरे बैठे हैं, हाथों पर हाथें 'रवीन्द्र'।

कभी करते थे बातें जो रफ़्तार की।।


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ख़ार = कांटा

आयेगा फिर सवेरा....


 आओ हम एक दूजे से,  यही करार लें,

करके जरूरतें कम, कुछ दिन गुज़ार लें।


माना है दौर मुश्किल, परेशानियाँ बहुत,

नाहक न निकलें बाहर, जीवन संवार लें।


आयेगा फिर सवेरा, गुज़रेगी स्याह रात,

बेहतर है इस घड़ी में, अपनों को प्यार दें।


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#Stayhome_staysafe

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Monday, 29 March 2021

तीन रंगों से निखरता, एक नया आसमान...


 गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं...


कर फ़तह मैदान हर, हौसलों को उड़ान दे।

मुल्क की सलामती के, हक में सारे बयान दे।

सींच दे इस मुल्क को, अपने लहू से ऐ रवीन्द्र।

तीन रंगों से निखरता, एक नया आसमान दे।


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एक सुंदर उपहार है जीवन...


आओ हिल मिल रंग लगाएँ,
अपनेपन के फूल खिलाएँ।

मगन रहें जीवन धुन में हम,
प्रेम रतन धन गीत सुनाएँ।

भूलें अनचाहे जख़्मों को,
नेह भरे मरहम भी लगाएँ।

मंज़िल कितनी दूर हो चाहे,
बिना रुके हम बढ़ते जाएँ।

दिन हो उनींदे रात हो काली,
चमकीले से ख़्वाब सजाएँ।

ओस की बूंदें आ पत्तों पर,
नित इंद्रधनुषी रंग बनाएँ।

एक सुंदर उपहार है जीवन,
हर दिन हम त्यौहार मनाएँ।

Ravindra Pandey

प्यारी बिटिया आद्या को जन्मदिन के सुअवसर पर कोटिशः बधाई एवं शुभकामनाएं...


 

Friday, 2 October 2020

यहाँ तो लोग, दिलों में दीवार रखते हैं...


अपने मुल्क़ की बेहतरी के ख़्वाब क्या देखूँ...

यहाँ तो लोग, दिलों में दीवार रखते हैं।


किसी मज़लूम की हालात से पसीजें ना भले...

मग़र लाशों को, सब सरे बाज़ार रखते हैं।


मची है होड़ क्यूँ, सब हैं अगर ये पैरोकार...

भाई-भाई में फिर क्यों दरार रखते हैं।


सिखाये जिसने हमें ककहरे तुतलाते हुए...

ज़बां क्यूँ उनके लिए धारदार रखते हैं।


सभी को चाहिए बरक़त, अमन, चैन ओ सुकूं...

कोई बतला दे, फिर क्यों औज़ार रखते हैं।


किसे परवाह 'रवीन्द्र', तड़पते बड़े बूढ़ों की...

सजा के रौशनी में, सब मज़ार रखते हैं।


...©रवीन्द्र पाण्डेय

छायाचित्र गूगल से साभार...

पल दो पल के साथ का.....

पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी रहा... ------------------------***-------------------- पल दो पल के साथ का, मुंतज़िर मैं भी...